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सीखने से सिखाने तक के सफर में खुद मे बदलाव – Aavishkaar

सीखने से सिखाने तक के सफर में खुद मे बदलाव

आविष्कार के सफर में यह मेरा तीसरा ब्लॉग है। इन छह महीनों में मैंने बहुत कुछ सीखा है। उन में से कुछ बातें आज मैं इस ब्लॉग के जरिये आपसे साझा कर रही हूँ। आविष्कार में सीखने से सिखाने तक के सफर में मुझमें बहुत बदलाव आया है। आविष्कार में मैंने जो पढ़ा है वह मैने खुद के लिए तो सीखा ही है लेकिन किसी को सिखाने के लिए भी सीखा है।

Knowledge

इन छह महीने मैंने प्राथमिक गणित के विषय पढ़े हैं और उस में से कुछ विषय मैंने अपने इंटर्नशिप के बच्चों को पढ़ाए भी हैं। इन सभी विषयों में से मुझे सबसे अच्छा विषय भिन्न लगता है क्योंकि जब मैने अपनी कक्षा में भिन्न को पढ़ा था तो मैने सिर्फ उसको रटा था लेकिन उसकी समझ नहीं बनी थी। जब मैने यहाँ उसको पढ़ा और समझा तो मुझे भिन्न के सत्र (session) में बहुत मजा आता था। इस सत्र में मैंने भिन्न की समझ बना ली है।

यह मेरे लिए गर्व की बात है कि अभी मैं बच्चों को भिन्न पढ़ाती भी हूँ। जब मैं बच्चों को पढ़ाती हूँ तो सत्र के बीच में बहुत सी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है, जैसे कि: एकदम से नेटवर्क का चला जाना, या फिर मेरी भाषा सही न होना, उनके प्रश्न में प्रश्न करके उन्ही से उत्तर निकालना, आदि चुनौतियाँ आती रहती है।

Skills learnt

बच्चों को पढ़ाने के लिए मैंने बहुत से कौशल सीखे हैं और उनका इस्तेमाल भी करती हूँ, जैसे कि: Google Suite, Canva, Inshot, Lesson plan, making presentation, google slides, story telling, बच्चों में सामाजिक और भावनात्मक विकास, बच्चों के साथ अच्छा संबंध बनाना।  

इसमें मैंने Google Docs. में ब्लॉग लिखना, लेसन प्लान बनाना, बिग आईडिया लिखना आदि सीखा। Canva में पोस्टर, प्रेजेंटेशन आदि बनाना सीखा। Inshot में मैंने वीडियो एडिट करना सीखा।

Mindset about Math

जब मैं स्कूल में गणित पढ़ती थी तब मैंने गणित को सिर्फ रटा और याद किया था लेकिन गणित में मेरी कभी समझ बनी ही नहीं। मैं सिर्फ रट लेती थी। इसलिए मेरा कभी गणित से अच्छा संबंध नहीं बना और मैं गणित से भागती थी। ये मेरी स्कूल के समय से गणित को लेकर मानसिकता थी।

पहले तो मुझे पढ़ाना अच्छा नहीं लगता था। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं कभी बच्चों को पढ़ाऊँगी क्योंकि मेरे अनुसार एक अध्यापक को बच्चों को पढ़ाने के अलावा, उनकी भावनाओं को समझना चाहिए, उनसे दोस्ती करनी चाहिए ताकि बच्चे उनसे कभी भी सवाल पूछने से डरे नहीं। पहले मेरे में ऐसे कोई गुण नहीं थे कि मैं बच्चों को पढ़ाती। लेकिन आविष्कार में आने के बाद मैंने सिखा कि बच्चों को किस तरह से पढ़ाया जाता है, बच्चों को सत्र में कैसे engage रखना है ताकि वह सत्र में एक्टिव रहें। अभी इंटर्नशिप में बच्चों की क्लास लेकर भावनाओं के बारे में जाना, उनको किस तरह क्लास में engage रखना है, गणित का concept उनको कैसे पढ़ाना है या कैसे इंस्ट्रक्शंस होने चाहिए कि उनको समझ में आ जाए। बच्चों को पढ़ाने से मेरे अंदर सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि हमेशा धैर्य (patience) रखना सीख गयी हूँ जो कि मुझसे पहले होता ही नहीं था। 

अब गणित को लेकर मेरी मानसिकता बदल गयी है, क्योंकि अब गणित को मैं अपने आस पास की दुनिया से जोड़ पाती हूँ। गणित को मैं अपनी निजी जरूरतों के हिसाब में भी इस्तेमाल कर पाती हूँ। 

Values

मेरे मूल्य यह हैं कि मैं एक महनती लड़की हूँ, टीम में काम करती हूँ, किसी भी चीज़ को जल्दी सीख लेती हूँ, जिम्मेदारी लेती हूँ, हमेशा धैर्य रखती हूँ, कुछ संदेह (doubt) हो तो सवाल करती हूं, सबकी respect करती हूँ और कभी भी शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान फिर भी मेरे चेहरे में हमेशा मुस्कुराहट होती है।

आशा करती हूं कि मेरा ब्लॉग आपको पसंद आया होगा और इस ब्लॉग से आपको प्रेरणा मिली होगी। 

-Arti Dhiman
Aavishkaar Fellow, 2021


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