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आस पास की दुनिया । – Aavishkaar

आस पास की दुनिया ।

“अगर अपने आस पास की दुनिया ख़ूबसूरत है तो दुनिया में कुछ  भी बुरा नहीं लेकिन अपने आस पास की दुनिया में ख़ुशी न हो तो कुछ भी अच्छा नहीं” ।

इंसान अपने आस पास की दुनिया को सरल बनाने के लिए , ख़ुशियों में रहने के लिए या यूँ कह लीजिए कि वह अपनी दुनिया को ख़ूबसूरत बनाने के लिए या ख़ूबसूरत  देखने के लिए क्या – क्या नहीं करता । इस दुनिया में कोई भी इंसान या जानवर यह कभी नहीं चाहेगा कि उसकी दुनिया दुखों से भरी हो, वह उसे सुख में ही देखना चाहेगा । 

आज के ऐसे वक़्त में जहाँ दुनिया में महामारी फैली हुई है ऐसे वक़्त में इंसान क्या चाहेगा कि उसकी अपनी दुनिया ख़ुशहाल रहे । आज जहाँ बच्चों का स्कूल जाना नामुमकिन सा हो गया है फिर भी ऐसा कोई नहीं चाहता है कि बच्चे बस घर में बैठे ही रहे । हर बच्चे के माता पिता और उनके अध्यापक यही चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़-लिख जाएँ ताकि आगे की उनकी दुनिया ख़ूबसूरत हो और बुढ़ापे में हमारा सहारा बन सकें । इसके लिए आज के ऐसे दौर में मैंने यह देखा कि बच्चों के माता पिता जो कि ज़्यादा पढ़ा-लिखे न होने के बावजूद भी अपने बच्चों को अच्छे से पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं । सब चाहते हैं ऐसे वक़्त में मेरे बच्चे पीछे न रहे। 

 यह वक़्त मुश्किलें तो बढ़ा रहा है लेकिन इन मुश्किलों में भी कभी कभी कुछ ऐसा देखने को कुछ ऐसा करने को मिलता है जिसे कर के अंदर से  ख़ुशी महसूस होती है और वह  ख़ुशी इतना सुकून देती है कि उसमें बह जाने को मन करता है ।

आज के वक़्त में हम भी कोशिश कर रहे हैं कि बच्चों तक पहुंचा जा सके । इसके लिए आविष्कार संस्था कुछ स्कूल के व्हाट्सप्प के समूह में जुड़ी हैं ताकि बच्चों को इससे मदद मिले । मैं भी स्कूल के समूह में जुड़ी हूँ और बच्चों को सवाल भेजती हूँ । मैं समूह में गणित के सवाल भेजती हूँ लेकिन इसमें ऐसे सवाल भेजने की कोशिश करती हूँ कि उन्हें करने में बच्चों को आनंद आए मेरी इतनी कोशिश रहती है कि बच्चे बस इसे एक अध्यापक का सवाल समझ कर जवाब न दे बल्कि उस सवाल को करने में उन्हें आनंद आए , सुकून पहुँचे। बच्चों को सवाल अच्छे से समझ आए इसके लिए मैं हर बार उस सवाल की वीडियो बना कर और लिख कर दोनों ही तरह से बच्चों को भेजती हूँ। अगर फिर भी उन्हें किसी तरह से सवाल समझ नहीं आए तो बच्चे कॉल करके पूछते हैं और  फिर  उस सवाल को तोड़ तोड़ कर एक आसान भाषा में , सरल भाषा में बच्चों को बताना और फिर बच्चों के जो जवाब आते हैं चाहे वह सही हो या उसमें कुछ गड़बड़ी हो लेकिन फिर भी मन को शांति मिलती है कि बच्चे बिना झिझक के  सवाल पूछ रहे हैं और जवाब देते हैं, इस वार्तालाप में बार बार सवालों को तोड़ कर बच्चों को उसके जवाब तक पहुंचाने में सुकून मिलता है ।

इस पूरी क्रिया में बच्चे तो सिर्फ सवाल के जवाब तक पहुँचने की कोशिश करते हैं लेकिन इन सब में मुझे बहुत कुछ सीखने को मिलता है ।

चाहे काम छोटा या बड़ा लेकिन किसी को उस काम करने से अगर सीख मिलती है कोई उस काम से कुछ सीख रहा है तो उस काम से बढ़ कर उसके लिए और क्या हो सकता है ।।

देखा जाए तो इस दुनिया में न कुछ कठिन है और न कुछ आसान, लेकिन एक बार अगर करने की ठान लो तो हर मुश्किल काम को आसान बनाया जा सकता है ।बच्चों के लिए यह कठिन है लेकिन उस को आसान बनाना हमारा काम है ,अगर हम ही उस काम में दिलचस्पी न दिखाए बस देकर छोड़ दें तो क्यों कोई उसमें दिलचस्पी दिखाए । मैंने कभी भी सवाल भेज कर सिर्फ यह सोच के नहीं छोड़ दिया कि जवाब आए तो भी ठीक और न आए तो भी ठीक । मैं कम से कम उन बच्चों के लिए कोशिश करती हूँ जो सवाल करते हैं, जो काम करने में दिलचस्पी दिखाते हैं । मैं हमेशा यह कोशिश करती हूँ कि बच्चों के लिए कोई ऐसा सवाल भेजूँ जिसे करने में उन्हें मज़ा आए उन्हें ख़ुशी हो मैं हर बार कोशिश करती हूँ कि उन्हें एक पहेली जैसा सवाल दूं क्योंकि उनके विषय में से तो उनके अध्यापक भी हर दिन होमवर्क देते हैं तो इसीलिए मैं सोचती हूँ कुछ अलग करूँ ताकि वह ख़ुशी से करें । जिसमें उनको सोचना भी पड़े और उन्हें करने में ख़ुशी भी हो और सबसे बड़ी बात ऐसे सवालों से उनके सोचने की शक्ति बढ़ेगी और उनके दिमाग़ का भी विकास होगा ।

मैं अपने आप को ख़ुशनसीब मानती हूँ कि ऐसे वक़्त में मुझे यह मौका मिला है कि मैं बच्चों के लिए कुछ कर पाती हूँ भले ही किसी के लिए यह काम बहुत बड़ा या कुछ भी नहीं हो परन्तु मेरी लिए यह बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है और इसे करने में मेरे मन को ख़ुशी मिलती है ।

जो काम करने में हमारे मन को शांति मिलती है, ख़ुशी मिलती है उस काम को करने में कभी पीछे मत रहो।

बबली।


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