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बदलाव – Aavishkaar

बदलाव

मनुष्य जीवन में बदलाव बहुत जरूरी हैं नहीं तो मनुष्य अपने जीवन में कभी आगे बढ़ ही नहीं सकता । जिंदगी बहुत बड़ी हैं अगर हम अपनी उसी सोच को ले-के आगे बड़े तो कभी हम आगे बढ़ ही नहीं सकते कभी कुछ पा ही नहीं सकते ।

मनुष्य में एक बहुत बड़ी ताक़त हैं वह हैं भूल-ने की ताक़त वैसे तो ‘भूलना’ इस शब्द को सुन के ऐसा लगता हैं कि यह नकारात्मक शब्द हैं लेकिन अगर देखा जाए तो मनुष्य में भूल-ने की ताक़त ना हो तो कभी वह आगे बढ़ ही नहीं सकता अगर उसके साथ कोई घटना हुई हैं या कोई ऐसी बात हुई हो जिसे वह भुला ही नहीं पाता तो कभी वह आगे बढ़ ही नहीं सकता वह उन्हीं बातों में उलझा रहता ।

सिर्फ़ सोचने मात्र से तो कुछ नहीं होगा ना , कुछ पाने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा और अगर कुछ पाना हैं तो सबसे पहले अपने अंदर ‘बदलाव’ लाना हैं । उन चीज़ों को पाने के लिए उनके पीछे भागना हैं जो हमारा सपना बन गई हैं जो हमें रात भर सोने नहीं देती । अभी तो ज़िंदगी की असली शुरुआत हुई हैं अभी तो हम सो के उठे हैं लेकिन अब सो-ना नहीं हैं क्योंकि समय किसी के लिए नहीं रुकता आज कुछ करने का मौका मिला हैं तो उसे ऐसे ही जाने नही देना हैं उस समय का सदुपयोग करना हैं , यह समय कभी लौट कर वापस नहीं आएगा और सबसे बड़ी बात कि खुद समय के पास भी इतना समय नही हैं कि वह हमें दोबारा समय दे सके।

तो बदलते समय के साथ चल , मिला के इससे हाथ चल

बदलाव सृष्टि का नियम हैं , समझ के यह बात चल ।

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मुझे आविष्कार में आए आज आठ महीने हो गए मैंने यहाँ आकर बहुत कुछ सीखा जो मेरी ज़िंदगी में पहली बार हुआ यह जो आज मैं लिख रही हूँ इससे पहले मैंने कभी अपने मन से कुछ नही लिखा था कभी सोचा भी नहीं था कि मैं ब्लॉग  लिखूँगी। अपने आप मेरी जीवन में यह बदलाव आ गया जैसा मैंने पिछले कुछ दिनों में महसूस किया जैसा मेरे साथ हुआ बस वैसा ही  लिखती गई और इससे मेरे अंदर बहुत बड़ा बदलाव आया हैं अब मैं चीज़ों को बारीकी से देखने लगी हूँ ।

लेकिन अभी मुझे यहाँ बहुत कुछ सीखना हैं अपनी इस दो साल की फ़ेलोशिप में कुछ ऐसा सीख के जाना चाहती हूँ जो पूरी ज़िंदगी मेरे काम आए और मैं कहीं भी जाऊँ तो गर्व के साथ बोल सकूँ कि अपनी ज़िंदगी के दो साल मैंने आविष्कार में बिताए और वहाँ से मैंने यह सीखा ।

मैंने यहाँ आकर इतना सीख लिया हैं कि ज़िंदगी में कोई भी काम मुश्किल नही होता अगर ठान लो तो वह होकर ही रहेगा बस कभी हार नही मान-नी हैं अगर बीच में कुछ रूकावट आए तो उस इन्सान के साथ बात करो जो हमेशा आपके साथ हैं जो आपको उठा हुआ देखना चाहता हैं लेकिन कभी हार मत मानो और मेहनत करना मत छोड़ना । मुश्किलें तो हमेशा हमारा रास्ता रोके गी लेकिन उनसे डर-ना नहीं हैं हमेशा अपने अंदर हौसला बना के रखना हैं

मुश्किलों से लड़ना सी-खो

हौसलों को कभी डगमगा-ने मत दो

ज़िंदगी एक ना एक दिन करवट बदलेगी , बस खुद को बदलना सी-खो

दुनिया जो सोचे सोचने दो , अगर ज़िंदगी मिली हैं तो उसे जीना भी सी-खो ।

क्योंकि मुझे हमेशा वह स्थान दिया गया जहाँ मैं अपनी बात को रख सकी ओर यही सबसे बड़ी वजह हैं कि मैं अपने अंदर बदलाव ला पाई पहले कभी ऐसा किसी ने मौका नही दिया तो कभी खुद को किसी के सामने नही ला पाई खुद कि बात को कभी किसी के सामने नही रखा लेकिन अब जा-के ज़िंदगी ने यह मौका दिया हैं तो मैं इसे किसी भी हालत में बेकार नही जाने दूँ-गी इसका इस्तेमाल पूरी शिद्दत के साथ करना हैं ।

मेरे स्कूल के समय में स्कूल के बाहर के बोर्ड पर हर दिन एक अनमोल वचन लिखा जाता था जिसमें से एक वचन ऐसा था जो हमेशा मेरे दिल को छू जाता था और कभी भी मैं कुछ उस बोर्ड पर लिखती तो हमेशा वही वचन लिखती थी कि :-

काम करो ऐसा की नाम बन जाए ,

हर कदम चलो ऐसा कि निशान बन जाए ,

ज़िंदगी तो सब जी लेते हैं लेकिन जियो ऐसा कि मिसाल बन जाए ।।

मैं ज़िंदगी में हमेशा सीखना चाहती हूँ बस एक जगह टिक के नही रहना हैं हमेशा एक शिक्षार्थी बनी रहना चाहती हूँ बोलते हैं ना कि बूँद बूँद से घड़ा भरता हैं कभी उस घड़ा भरने की चिंता नहीं हैं लेकिन वह बूँद बूँद हमेशा जारी रखनी हैं ।


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