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बातें मन की । – Aavishkaar

बातें मन की ।

मैं अपनी जिंदगी का ये दूसरा ब्लॉग लिख रही हूँ वास्तव में मैं अपने दिल की बातें कभी किसी को बोल नहीं पाती थी लेकिन अब आविष्कार में आने के बाद काफी कुछ अपने दिल की बातें बोल पाती हूँ और जो बातें मैं बोल नहीं पाती उन्हें मैं अब अपने ब्लॉग के ज़रिये बताने की कोशिश करती हूँ ।

 

मेरा हमेशा से ये अरमान था कि मैं भी हिमाचल से बाहर जाऊं बाहरी दुनियाँ को देखूँ । हिमाचल की दुनिया तो पहाड़ी दुनिया है पर मैं मैदानी इलाकों में भी जाना चाहती थी । वहाँ पर भी अपनी ज़िन्दगी के कुछ पल जीना चाहती थी । तो इसी बीच में एक दिन आया जब हमे आविष्कार में बोला गया कि हम तीनों फ़ेलोस को बिहार जाना है । वहाँ नारी गुँजन एक संस्था है जहां पर महादलित लड़कियों को शिक्षा दी जाती है । वास्तव में नारी गुंजन में जाना मेरा एक सपना बन गया था क्योंकि जब से मैं आविष्कार आई हूँ तब से मैंने यहाँ पर सबसे ज़्यादा नारी गुंजन और वहाँ की लड़कियों के बारे में सुना है जब भी लड़कियों पर कुछ भी बाते होती तो वहाँ की लड़कियों का ज़िक्र ज़रूर होता । तो ये सब देख कर मेरा भी एक अरमान बन गया था कि मैं भी बिहार जाऊं और उन लड़कियों से मिलूं ।

 

तो यहाँ पर आविष्कार में अचानक से ये विचार बना कि हमे बिहार जाना है और पहले से ही आविष्कार से दो लोग बिहार गए हुए थे जिन लोगों से सुनने को मिल रहा था कि वहाँ पर बहुत ज़्यादा गर्मी है तो अब मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं इस बात की खुशी मनाऊ कि मेरे दिल का अरमान पूरा होने जा रहा है कि इस बात पर दुःखी हूँ कि वहाँ पर बहुत गर्मी है । पर जो भी था मुझे वहाँ जाना था और उन लड़कियों से मिलना था जिनके बारे में मैंने बहुत सुन  था आविष्कार में ।

 

वास्तव में मैं पहली बार हिमाचल से बाहर जा रही थी तो दिल में थोड़ा डर भी था पर इस बात की बहुत ज़्यादा ख़ुशी थी कि हवाई जहाज़ से जाने वाली हूँ क्यूंकि मेरी ये पहली हवाई यात्रा थी और मेरे लिए ये सब कुछ नया था । जब भी कभी जहाज़ को उड़ता देखती थी तो मैं सोचती थी कि काश कभी मैं भी इसमें उड़ान भर सकूँ और आज वह दिन आया था  । ऐसा लग रहा था कि मैंने अपनी जिन्दगी की छोटी सी उड़ान भरी है जिसका अनुभव मेरे लिए बहुत ख़ास था कि कैसे हम बादलों को चीरते हुए आगे बढ़ते हैं ये नज़ारा बहुत सुंदर था ।

 

अब तक तो बहुत अच्छा चल रहा था लेकिन जब मैंने जहाज़ से बाहर क़दम रखा तो मैं बयान नहीं कर सकती वहां कितनी गर्मी थी मुझे लग रहा था कि किसी ने मुझे आग के उपर रख दिया है । उस दिन मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था । पर जैसे ही मैं दूसरे दिन वहां की लड़कियों से मिली उनकी मुस्कराहट को देख के तो मैं मोहित सी हो गईं उन से मिल के लगा जैसे वो काफी दिनों से हमारा इंतजार कर रहीं हो । आज में पहली बार उन से मिली थी पर ऐसा लग रहा था कि ये पहली मुलाक़ात नहीं है जैसे हम काफ़ी दिनों से सब एक दूसरे को जानते हैं । मैंने उन के बारे में बहुत सुना था पर अब लग रहा था कि जितना भी सुना है बहुत कम था । क्योंकि जब मैंने उन लड़कियों के सपने और उनके हौंसले के बारे में सुना और देखा तो ऐसा लग रहा था जैसे मैं ख़ुद कोई सपना देख रही हूँ । उन लड़कियों को ग़रीब , निर्धन बोला जाता है मगर वास्तव में देखा जाए तो उन से बड़ा धनी कोई नही है  क्योंकि उन के चेहरे पर मुस्कान रूपी धन है जो हमेशा वैसा ही है । चाहे आप जितने भी दुःखी हो परेशान हो पर उनकी वह मुस्कान एक पल के लिये ही सही पर सुकून देती है जहाँ हम अपने दुख भूल जाते हैं । और मैंने उन लड़कियों से एक बात सीखी कि हमें अपनी ज़िन्दगी में इतना भी निर्धन नही होना चाहिए की हम दूसरों को एक मुस्कराहट तक भी ना दे सके । उनकी इस मुस्कराहट का कारण सुधा जी हैं ।

 

सुधा वर्गीस जो कि नारी गुंजन की शान हैं। वह नारी गुंजन संस्था को चलाती हैं । वास्तव में वह केरल की रहने वाली हैं  2006 में उन्हें पदम श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया । तो उनसे मिलना भी मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी क्योंकि उन्होंने उन बच्चियों के लिए और सामाजिक सेवा के लिए अपने घर परिवार को छोड़ दिया और यही त्याग उनको महान बनाता है । अब वह बिहार में ही रहती हैं एक तरह से मान सकते हैं कि वो मुसहर ज़ात की लड़कियों के लिए वरदान बन के आई हैं । और मुझे बहुत अच्छा लगता था जब भी सुधा जी मुझे कोई काम देती अगर मैं खाली बैठी होती तो कुछ न कुछ मुझे काम दे देती थी जो मुझे बहुत अच्छा लगता था । अगर वहाँ की लड़की कोई शिकायत ले के उन के पास जाती तो वह उन लड़कियों को मेरे पास भेज देती थी चाहे वह शिकायत पढ़ाई को लेके होती या उनके मासिक अवधि से । तो जब वह लड़कियों को मेरे पास भेजती तो मुझे बहुत अच्छा लगता था कि किसी न किसी तरीक़े से मैं भी उनके लिये कुछ कर पा रही हूँ।

 

वास्तव में उन लड़कियों के सपने तो बहुत बड़े बड़े हैं पर उनके पूरा होने में अभी भी कई मुश्क़िलात पेश आती हैं क्योंकि मैंने वहां पर ये बात सुनी कि लड़कियां वहां से 10th पास करके जाती हैं और घर में उनकी ज़बरदस्ती शादी करवा दी जाती है तो वास्तव में नारी गुंजन में भेजने से उनके परिवार का यही इरादा रहता होगा कि उनकी बेटियां घर से दूर रहे और फिर जैसे ही घर वापिस आती हैं तो उनकी छोटी सी उम्र में ही शादी करवा दी जाती है जहाँ उनके खेलने कूदने के दिन हैं वहां उनके हाथ पीले कर दिए जाते हैं । तो इसी बात को सोच के वहाँ की बेटियाँ कभी अपने घर भी जाना नही चाहती । उन लोगों को अपनी इस सोच को बदलना होगा क्योंकि :-

 

बेटियों का भी एक अहम वजूद है ।

उन्हें भी जीने की भूख है ।।

 

मैं वहाँ की हर लड़की से मिली उन लड़कियों से मेरी काफ़ी बात चीत होती थी तो जब भी मैं उनके घर परिवार के बारे में पूछती तो वो बहुत कुछ बताती  और वो सभी मुझसे से भी बहुत कुछ पूछती थी तो मैं भी अपने परिवार के बारे में बताती थी कि मेरे परिवार में ऐसा कुछ नहीं होता  है बेटियों के साथ शादी को लेकर कोई ज़बरदस्ती नहीं होती है । जब तक हमारी मर्ज़ी ना हो तब तक कोई नहीं बोलेगा । तो जब भी मैं अपने बारे या अपने परिवार के बारे में बताती तो वो लड़कियां बस सुनती रहती और वो बोलती दीदी आप अपनी बाते सुना रहे हो, जैसे हम कोई सपना देख रहे हैं और उनकी ये बात सुन के मै बहुत भावुक हो जाती थी क्योंकि उनके देखने का अंदाज अलग था वो भी अपनी आज़ादी चाहती हैं । मैंने कभी अपनी जिंदगी में एक बात सुनी थी जो मुझे उस वक़्त याद आई कि  :-

 

कभी अपनी जिंदगी से रूठना मत ।

क्या पता आपकी जैसी जिंदगी किसी का सपना हो ।।

 

उन लड़कियों में बहुत होंसला है बहुत कुछ करना चाहती हैं वो।

बस उन्हें सहारे की ज़रूरत है । ये होंसला उन्हें नारी गुंजन आने के बाद मिला है । सभी लड़कियाँ मुझसे खुल के बात करती थी जो भी उनके मन में बात होती थी। एक 9th कक्षा की लड़की ने एक दिन मुझसे अपने परिवार की बहुत सी बाते बताई । उसने बताया कि मेरे पापा कभी कभी घर में शराब पी कर आते थे और मम्मी पर हाथ उठाते थे तो उसने बोला उस वक्त मैं कुछ नही कर पाती थी क्योंकि मैं बहुत डरती थी । लेकिन उसने कहा जब मैं नारी गुंजन आई यहाँ पर आके मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला । और धीरे धीरे मेरा डर भी जाने लगा । मैंने अपने अंदर होंसला लाया और यहाँ पर आने से मैंने एक बात सीखी की जिंदगी में कभी भी कोई भी परिस्तिथि आये कभी भी उसका  डर के सामना नही करना है उस परिस्तिथि को निडर हो कर सुलझाओ । फिर चाहे उसका परिणाम जो भी हो पर इतनी संतुष्टि होगी कि मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की । उसने कहा फिर एक दिन मैं नारी गुँजन से घर गई और घर में सभी से मिली मुझे बहुत अच्छा लगा बहुत दिन बाद मैं अपने परिवार से मिली । पर उसके दूसरे दिन मेरे पापा शराब पी कर घर आये और मम्मी को बहुत कुछ सुनाने लगे और आज भी पहले की तरह उन्होंने मम्मी पर हाथ उठाया उसने कहा मैं देखती रही । मैंने कुछ नही बोला पर बात बढ़ती गई  और उसके बाद मैं एकदम से उठी और मैंने पापा का हाथ पकड़ा और कहा कि मम्मी पर हाथ मत उठाओ पर पापा नहीं माने उन्होंने मुझे भी धक्का दिया और मम्मी को फिर से मारने लगे और मुझे इतना गुस्सा आया कि मैंने भी पापा पर हाथ उठा दिया और पापा उस वक़्त मुझे कुछ नहीं बोल सके और तब से लेकर आज तक मेरे पापा ने मेरे सामने मम्मी पर कभी हाथ नहीं उठाया। उसने कहा दीदी मुझे बहुत बुरा लगा कि मैंने अपने पापा पर हाथ उठाया पर फिर मैंने सोचा जो मेरे पापा कर रहे थे क्या वो सही था ऐसे कैसे बिना वजह वह किसी पर हाथ उठा सकते हैं तो उसने कहा हाँ मानती हूँ मैंने ग़लती की पर ये ग़लती मुझे मंज़ूर है  क्योंकि वह अन्याय था और उस समय मेरी मां की कोई ग़लती नहीं थी । और ये साहस उसने नारी गुँजन में आने के बाद पाया और ये सब सुधा जी की ही देन है ।

 

लड़कियों के इन्हीं होंसले और साहस को देख के नारी गुँजन की एक अध्यापिका ने बच्ची को गोद लेने की बात की। वह अध्यापिका कुछ समय पहले ही नारी गुँजन में आई हैं तो उन्होंने एक दिन अपने दिल की बात बताई उन्होंने मुझसे कहा मेरा एक ही बेटा है और मेरे परिवार को और मुझे हमेशा से ही एक बेटा चाहिए था और मुझे बेटा हुआ इससे हम सब बहुत खुश थे । पर जब से मैं यहाँ नारी गुँजन आई हूँ तब से मुझे इतना बुरा महसूस होता है कि मेरी बेटी नहीं है वह कहती काश मेरी भी एक बेटी होती और वह बिल्कुल यहाँ की लड़कियों जैसी होती । उन्होंने कहा मेरे दिल और दिमाग में बेटी ही बस गई । ये बात मैं दिन रात सोचती रहती थी कि काश मेरी भी बेटी होती और एक दिन मैंने अपने पति को बोला की मुझे एक बेटी गोद लेनी है पर  मेरे पति ने कोई जवाब नही दिया मगर मैं पूछती रहती थी और एक दिन उन्होंने कहा कि मुझे एक महीने का वक़्त दो मैं सोचता हूँ इस बारे में । तो उन्होंने कहा जब मेरी गोद में एक बेटी आयेगी ना तब जाकर मुझे लगेगा अब मैं मां बनी हूँ ।

 

तो इस बात को देख के हम सोच सकते हैं कि वहाँ की लड़कियां कैसी होंगी कि बिहार की एक औरत ने लड़की को गोद लेने की बात की । ये बहुत बड़ी बात है । तो जो लोग बेटियों को बोझ मानते हैं उन्हें मैं कहना चाहूँगी कि एक बार बेटी को आज़ाद कर के देखो उसे आगे बढ़ने का होंसला दो एक दिन वह आपका नाम ऊँचा कर के दिखाएगी ।

 

क़िस्मत वाले हैं वह लोग ,

जिन्हें बेटियाँ नसीब होती हैं ,,

ये सच है कि उन लोगों को

रब की मोहब्बत नसीब होती है ।।


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