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“लक्ष्य, कुछ करने का” – Aavishkaar

“लक्ष्य, कुछ करने का”

आज तक के अपने अनुभव से मैंने सीखा कि जरूरी नही है कि ज़िंदगी में कुछ करने के लिए या कुछ हासिल करने के लिए हमें शुरुआत से ही अपना “लक्ष्य” बनाना चाहिए या हमारे पास हमारा लक्ष्य होना चाहिए । हाँ यह बिल्कुल सही बात है कि अगर हम अपनी ज़िंदगी में कुछ सोच के चले कि हमें यह हासिल करना है तो हम उस लक्ष्य के पीछे भागते हैं और उसको पाने के लिए हम उस रास्ते पर चल पड़ते हैं जहाँ उसके पूरे होने की संभावना दिखे ।

लक्ष्य ही सब कुछ है इंसान को इस ग़लतफ़हमी में भी तो नहीं रहना चाहिए । अगर किसी के पास कोई लक्ष्य नहीं है इसका मतलब यह नहीं कि वह अपनी ज़िंदगी में कुछ कर ही नहीं सकता ।

लक्ष्य का रास्ता हमें उसी की दुनिया दिखाता है जो हमने सोचा है जो हमने देखा है लेकिन ज़िंदगी में कुछ करने का रास्ता हमें सब कुछ दिखाता है जो हमने सोचा भी ना हो । यह रास्ता हमें मज़बूत बनाता है । तो जिनके पास अपना लक्ष्य नहीं है वह जीवन में रुके न चलते रहें हमें अपनी मंज़िल अवश्य मिलेगी ।

 अगर हम इतना सोच के भी चले कि हमें अपनी ज़िंदगी में कुछ करना है पता नहीं क्या करना है लेकिन हम  इस “कुछ करने ” के पीछे भी भागे तो भी हम ज़िंदगी में कुछ हासिल कर सकते हैं । हमें हमारा लक्ष्य अपने पीछे भगाता है और हम उसके पीछे पीछे भागते हैं । यहाँ हम वही सीखते हैं जो उसके रास्ते में सीखने को मिलता है ।

मेरा यहाँ पर बोलने का यह मतलब नहीं है कि लक्ष्य बनाना ग़लत है । सब के पास अपनी ज़िंदगी का एक लक्ष्य होना ज़रूरी है, कुछ करने का लक्ष्य। लेकिन कई बार हम यह सोच कर भी कुछ नहीं कर पाते क्योंकि हमारे पास तो अपना लक्ष्य है ही नहीं हम तो कुछ कर ही नहीं सकते । इस कुछ कर ही नहीं सकते की जगह ये सोचो कि हम कुछ कर सकते हैं और यही हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है ।

अगर लक्ष्य ज़िंदगी संवारता है तो 

बिना लक्ष्य के भी ज़िंदगी सँवारी जा सकती है बस उसके लिए हम में कुछ करने का जूनून होना चाहिए , कुछ सीखने का जज़्बा होना चाहिए ।

सोचने मात्र से कुछ नहीं होता यह नहीं कि ज़िंदगी में कुछ करना है बस सोचा है लेकिन उसके लिए कुछ करना नहीं मेहनत नहीं करनी है बस बैठे रहना है फिर तो आपका सोचना ही बेकार है क्योंकि जब तक मेहनत नहीं तब तक कुछ नहीं । कई बार इंसान यह सोच कर चलता है कि कुछ करने से कोई मतलब नहीं जो क़िस्मत में लिखा है वही मिलेगा । हाँ क़िस्मत में जो लिखा है वह मिल कर ही रहेगा लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम बस बैठे रहें कुछ करें ही न। अगर इंसान कुछ करने की ठान ले तो वह अपनी क़िस्मत भी बदल सकता है ।

मेरा कोई लक्ष्य नहीं है मैंने नहीं सोचा है कि मुझे अपनी ज़िंदगी में डॉक्टर बनना है , इंजीनियर बनना है या कुछ ओर । कभी मेरा कोई लक्ष्य ही नहीं था तो इसके चलते मैं भी यह सोचती थी कि मैं अपने जीवन में कुछ कर ही नहीं सकती क्योंकि कोई लक्ष्य ही नहीं है लेकिन धीरे-धीरे मुझे यह पता चला कि मेरा सब से बड़ा लक्ष्य तो यही है कि मुझे अपनी जीवन मे “कुछ करना” है । ऐसे हाथ में हाथ धरे नहीं बैठना है । ऐसी सोच रख के जो भी काम मुझे मिलता है मैं उसे कड़ी मेहनत से पूरी ईमानदारी के साथ करती हूँ और उसमें मिली कामयाबी या सीख मुझे इस बात के लिए हमेशा मज़बूत बनाती है कि ज़िंदगी में कुछ न कुछ करते रहो । और यहाँ ऐसा भी नहीं है कि यह हर जगह हाथ मारने वाला काम है  यह सिर्फ और सिर्फ आप पर निर्भर करता है कि आप अगर उस काम को करने में आपको कामयाबी मिली है या नहीं अगर नहीं तो ऐसा नहीं कि मेरा वह करना ही बेकार था । बेकार कुछ नहीं है बस हम उससे क्या सीखते हैं यह हम पर निर्भर है ।

और इस कुछ करने के पीछे हम बहुत कुछ सीखते हैं । बहुत कुछ ऐसा सीखते हैं जो कभी हमने न देखा होता है और न कभी उसको करने का सोचते हैं । लेकिन जब इस दुनिया में हम कुछ नया सीखते चलते हैं यही नए तरीक़े हमें जिंदगी जीने का मतलब समझाते हैं ।

बस सीखने के जज़्बे को बनाए रखना है 

आज अगर सीखने की होड़ है 

तो कल सीखने की कला होगी ।

ज़िंदगी तो पल पल करबटें बदलती है

पर इस बदलती ज़िंदगी में भी कुछ करने का हौंसला रखना है ।। 

बबली।


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