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Aavishkaar – Page 2 – Aavishkaar

Author: Aavishkaar

  • कोरोना को ख़त।

      प्रिय कोरोना, तुम हो तो ख़राब और बहुत कुछ ख़राब ही करा है, हर तरफ तुम्हारा ख़ौफ़ का साया है। सारी दुनिया को तुमने थमा सा दिया हैं मगर तुम फिर भी मेरे लिए प्रिय ही रहोगे वो इसलिए नहीं कि तुम्हारे आने से प्रकृति में फैले कार्बन उत्सर्जन द्वारा प्रदूषण में कुछ सुधार हुआ…

  • अदृश्य दोस्त या दुश्मन।

    सुना था “ज़िंदगी करवट बदलती है” और आज देख भी लिया । ऐसे तो हर इंसान सब कुछ चाह कर , सोच समझ कर करता है फिर उसकी ज़िंदगी में ऐसा क्यों होता है कि ना चाहते हुए भी उसे वह करना पड़ता है जो वह कभी नहीं चाहता । चाहे कोई कुछ भी कर…

  • Mapping the World of School Mathematics

    The fascinating world of mathematics offers its friendship to most of us in our school years. It’s another matter that it feels a bit too crushing and many of us decide not to extend that hand of friendship again. Here is an attempt to share the landscape of Maths that we explore in those school…

  • Brownian Motion – An Experimental Investigation.

    Shamli Manasvi, April 2020 The Particle Theory of Things, is – Everything can be broken down into smaller particles (analysis view). In other words, everything is made up of small particles (synthesis view). These particles have two fundamental properties – They are in constant random motion, And they all attract each other. But, really? I’m not…

  • पढ़ना, साझा करना, चर्चा करना।

    मैं हमेशा से ही ऐसी चर्चाओं का हिस्सा होना चाहता था, जिसमे सभी अपनी बात रखें और फिर एक निष्कर्ष पर पहुंचे जो सभी के लिए लाभदायक हो। ऐसी छोटी सभायेँ जहां पर लोग किसी महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार रखें उनका आदान प्रदान करें। बहुत सी किताबों मे पड़ा था की किस तरह से…

  • असंतुलित भाषा।

    असंतुलित भाषा।

    मैं हिंदी भाषी हूँ! पढ़ता हूँ! लिखता हूँ! बात करता हूँ!  और यहाँ तक की सोचता भी इसी भाषा में ही हूँ। क्योंकि…… मैं हिंदी भाषी हूँ!   अपने को अभिव्यक्त करने के लिए इसी को माध्यम बनाया है। अपनी बात अच्छे से कर पाता हूँ, पूरी स्पष्टता से अपनी बात को समझा भी पाता…

  • कल्पना।

    कल्पना।

    अगर देखा जाए तो इस दुनिया मे जो कुछ भी होता है सब ‘काल्पनिक’ है जो भी हम करते हैं जो कुछ भी हो रहा है सब कुछ, चाहे वह हमारी असली ज़िंदगी से वाक़िफ़ हो या फिर कोई पुरानी मिथ्य। अभी कुछ दिन पहले मैंने एक लेख पड़ा था जो की इसी बात पर…

  • स्पष्टता

    एक झूठे किस्से से थोड़ा समा बाँधते हैं शायद वो सच्चाई की दहलीज तक ले जाए। कल्पना कीजिये एक बच्चे की जो आपकी गोद में खेल रहा हैं, उसकी उम्र महज 1 साल हैं। वो अचानक से रोने लगता हैं। न जाने किस चीज की चाहत उसके मन में जग चुकी हैं पर वो बता…

  • बच्चों द्वारा मिला उपहार

    ये कहानी है उन बच्चों की जिनके साथ मैं पिछले आठ महीनों से जुड़ा हुआ हूँ। इन बच्चों में दिखते बदलाव मुझे मेरे प्रयत्नों के फल के रूप में दिख रहे हैं। ऐसे तो कई बच्चे हैं जिनमें मैंने कुछ ना कुछ परिवर्तन देखे हैं। लेकिन उनमें से भी एक बच्ची ऐसी है जिसके बारे…

  • बदलाव

    मनुष्य जीवन में बदलाव बहुत जरूरी हैं नहीं तो मनुष्य अपने जीवन में कभी आगे बढ़ ही नहीं सकता । जिंदगी बहुत बड़ी हैं अगर हम अपनी उसी सोच को ले-के आगे बड़े तो कभी हम आगे बढ़ ही नहीं सकते कभी कुछ पा ही नहीं सकते । मनुष्य में एक बहुत बड़ी ताक़त हैं…